भागवत गीतम ध्येयं सदा परिभवघ्नभीष्टदोहं

भागवत गीतम, ध्येयं सदा परिभवघ्नभीष्टदोहं, तीर्थास्पदं शिव विरंचिनुतं शरण्यं। भृत्यार्तिहं प्रणतपाल भवाब्धिपोतं, वन्दे महापुरुष थे चरणार्विंदम।। यूं प्रवजन्तमनुपेतमपेत कृत्यं, द्वैपायनो ...

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