नवरात्रों में माँ,
धरती पर आती है।
दोहा – ढोल नगाड़ों की,
सदा कह रही है,
नवरात्रों की सुहानी,
घड़ी आ रही है,
चांद सी बिंदिया,
मां के माथे सजी है,
हाथों पर मैया के,
मेहंदी लगी है।
नवरात्रों में माँ,
धरती पर आती है,
मैया अपने भक्तों के,
घर जाती है,
जो कीर्तन करता है,
मैया रानी का,
उसके सारे,
कष्टों को मिटाती है।।
तर्ज – दूल्हे का सेहरा।
दरबार सजायें जोत जगाएं,
तेरी अंबे मां,
सच्चे मन से भक्त,
तुमको बुलाए मां,
मैया भक्तों पर,
कृपा बरसती है,
मैया अपने भक्तों के,
घर जाती है।।
सिंह सवारी पर विराजे,
तेज है न्यारा,
शेरों वाली अंबे रानी,
जग की तू धारा,
भटके भक्तों को,
रस्ता दिखलाती है,
मैया अपने भक्तों के,
घर जाती है।।
लाल चोेले में सजी,
मेरी प्यारी मैया,
तुम बिन कौन किनारे,
लगाए “इंदु” की नैया,
मैया सबकी नैया,
पार लगाती है,
मैया अपने भक्तों के,
घर जाती है।।
स्वर – इंदु सामाना।
9988930536








