मुरलीधर को जिसने पूजा,
उसका ही उद्धार हुआ,
अंतकाल में भवसागर से,
उसका बेड़ा पार हुआ,
नन्द नंदन की पूजा करो,
ध्यान चरणों में सदा ही धरो।bd।
जय जगदीश श्याम अविनाशी,
जय जगदीश श्याम अविनाशी,
जय जगदीश श्याम अविनाशी।।
तर्ज – शिव शंकर को जिसने पूजा।
जिसके माथे चरण धूलि,
इसकी लगी,
उसकी सोई हुई भी है,
किस्मत जगी,
दयावान है ये,
दीनबंधु है ये,
महाकरुणा का सिंधु है ये,
इनके पदपंकज में आकर,
अर्पण जो इक बार हुआ,
अंतकाल में भवसागर से,
उसका बेड़ा पार हुआ।bd।
इसको तुलसी की पत्तियां,
जो अर्पण करे,
सुख सम्पति वैभव से,
झोली भरे,
इसने भक्तों के कारज,
सँवारे सदा,
डूबते को है तारा सदा,
हुआ यहाँ पर जो नतमस्तक,
उसका सुखी संसार हुआ,
अंतकाल में भवसागर से,
उसका बेड़ा पार हुआ।bd।
मुरलीधर को जिसने पूजा,
उसका ही उद्धार हुआ,
अंतकाल में भवसागर से,
उसका बेड़ा पार हुआ,
नन्द नंदन की पूजा करो,
ध्यान चरणों में सदा ही धरो।bd।
स्वर – नितिन मुकेश जी।







