म्हारे पग घुंघरू बंध जावे रे,
दोहा – फागण आयो सांवरा,
मैं तो हां तैयार,
अब की करस्या सांवरिए,
मुखड़े ने म्हे तो लाल।
म्हारे पग घुंघरू बंध जावे रे,
माघ महीनो बीत्यो,
फागण नीड़े आवे रे,
नीड़े आवे रे,
श्याम को मेले आवे रे,
ओ म्हारें पग घुँघरू बंध जावे रे,
माघ महीनो बीत्यो,
फागण नीड़े आवे रे।।
तर्ज – ढोला ढोल मजीरा।
पिछली साल थे काल कर्या था,
म्हारे से सरकार,
तन्ने बुलास्यूं बेटा अगले,
फागण सह-परिवार,
मनड़ो उड़ उड़,
खाटू जावे रे जावे रे,
म्हारो मनड़ो म्हारे ही ना,
बस में आवे रे,
ओ म्हारें पग घुँघरू बंध जावे रे,
माघ महीनो बीत्यो,
फागण नीड़े आवे रे।।
धमक द्वार जद सेवकिया के,
आंख्या आगे आवे,
ठुमक ठुमक तब थक्या पैर भी,
सरपट भाग्या जावे,
हाथा श्याम निशान थे,
ल्यावे रे ल्यावे रे,
चंग की थाप पे नाच नाच,
जयकार लगावे रे,
ओ म्हारें पग घुँघरू बंध जावे रे,
माघ महीनो बीत्यो,
फागण नीड़े आवे रे।।
ग्यारस की वा रात सुहानी,
कीर्तन माही बीते,
हर कीर्तन के हर प्रेमी में,
खाटू वालो दिखे,
‘सरिता’ श्याम मिलन ने,
आवे रे आवे रे,
उछल उछल कर ‘जितू’,
श्याम ने भजन सुनावे रे,
ओ म्हारें पग घुँघरू बंध जावे रे,
माघ महीनो बीत्यो,
फागण नीड़े आवे रे।।
म्हारे पग घुँघरू बंध जावे रे,
माघ महीनो बीत्यो,
फागण नीड़े आवे रे,
नीड़े आवे रे,
श्याम को मेले आवे रे,
ओ म्हारें पग घुँघरू बंध जावे रे,
माघ महीनो बीत्यो,
फागण नीड़े आवे रे।।
Singer – Vivek Sharma ‘Jitu’
Lyrics – Sarita Sharma








