प्रथम पेज राजस्थानी भजन मैया थारो कानुडो घणो ऐ बदमाश माखन की फोड़े माटकी

मैया थारो कानुडो घणो ऐ बदमाश माखन की फोड़े माटकी

मैया थारो कानुडो,
घणो ऐ बदमाश,
माखन की फोड़े माटकी।।



ए गुजरी कानुड़ो,

सुतो छ मेहला माय,
मत देवे झूठा ओलबा,
मैया थारो कानुड़ो,
घणो ऐ बदमाश,
माखन की फोड़े माटकी।।



मैया हमारी कान्हा का,

बांधा दोनों हाथ,
पैरा में घाली सांखलाया,
मैया थारो कानुड़ो,
घणो ऐ बदमाश,
माखन की फोड़े माटकी।।



जसोदा नंदलाला ने,

दिनी रे आवाज,
आंगण में बाजा घुघरा,
मैया थारो कानुड़ो,
घणो ऐ बदमाश,
माखन की फोड़े माटकी।।



ऐ गुजरी आज बाद,

मत लीजो झूठों नाम,
मत आजो मारे बारने,
मैया थारो कानुड़ो,
घणो ऐ बदमाश,
माखन की फोड़े माटकी।।



ए कान्हा थारा भजन,

मंडली करें गुणगान,
थे पार लगा दीजिए नावड़ी,
मैया थारो कानुड़ो,
घणो ऐ बदमाश,
माखन की फोड़े माटकी।।



मैया थारो कानुडो,

घणो ऐ बदमाश,
माखन की फोड़े माटकी।।

प्रेषक – सुभाष सारस्वत काकड़ा।
9024909170


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