काया थारी लूट रही,
बीच बाजार,
रूखाला क्यों नहीं चैते रे,
क्यों नहीं चैते रे,
रुखाला क्यों नहीं चेते रे,
काया थारी लुट रही,
बीच बाजार,
रूखाला क्यों नहीं चैते रे।।
थारी काया थारी माया,
याको मोल ना कोई,
महंगा मोल की काया थारी,
लूट रयो हर कोई,
काई सोचे बैठ्यौ यार,
रुखाला क्यों नहीं चेते रे,
काया थारी लुट रही,
बीच बाजार,
रूखाला क्यों नहीं चैते रे।।
पांच बरस तो लुट गया प्यारे,
खेल खिलौना माही,
बहन भुआ रे मायड़ली थारी,
दादी नानी ताई,
ऐ काका ताउ लूटे लाड लडार,
रुखाला क्यों नहीं चेते रे,
काया थारी लुट रही,
बीच बाजार,
रूखाला क्यों नहीं चैते रे।।
भरी जवानी तिरिया लूटे,
नित नया रूप सजाई,
और लुटाता जावे थने,
बेटा बेरी भाई,
गोडा थारा टिक ग्या बुढ़ापा में आई,
रुखाला क्यों नहीं चेते रे,
काया थारी लुट रही,
बीच बाजार,
रूखाला क्यों नहीं चैते रे।।
सारी लुट गई नहीं बची रे,
थारे हाथा माइ,
अब तो राम सुमिर ले रे बंदे,
ये है नगद कमाई,
भजन तू हरी का कर रे गोपाल,
रुखाला क्यों नहीं चेते रे,
काया थारी लुट रही,
बीच बाजार,
रूखाला क्यों नहीं चैते रे।।
काया थारी लूट रही,
बीच बाजार,
रूखाला क्यों नहीं चैते रे,
क्यों नहीं चैते रे,
रुखाला क्यों नहीं चेते रे,
काया थारी लुट रही,
बीच बाजार,
रूखाला क्यों नहीं चैते रे।।
देखें – थारी काया को गुलाबी रंग।
🎤 गायक / Singer – राजकुमार जी स्वामी।
📜 प्रेषक / Upload By – सुरेश कुमार सुथार।
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