कई गरब करे धन माया को,
कोनी भरोसो आणि काया को।।
राम भजन में चित नही दिदो,
संत समागम कबु नही किदो,
नही पड़ियो गुरु जी का चरणा में,
कोनी भरोसो आणि काया को।।
पाप कपट से पूंजी कमावे,
राजा अंग्नि चोर लेजावे,
कर करम सुखी धन माया सु,
कोनी भरोसो आणि काया को।।
जोर जवानी में करम कमायो,
गुरु पिता माता थने याद नही आया,
संग किदो रे तरिया वालो वो,
कोनी भरोसो आणि काया को।।
सुध कर्म में मन नही भावे,
धन- संतान पुण्य नही छावे,
कुछ दियो नही आया ने खाबा को,
कोनी भरोसो आणि काया को।।
कल्याण भारती हरि गुण गावो,
लख चौरासी में फेर नही आवो,
थाको छूटे फंद जम नाया को,
कोनी भरोसो आणि काया को।।
कई गरब करे धन माया को,
कोनी भरोसो आणि काया को।।
स्वर – विजय सिंह चित्तौड़गढ़।
मो. – 7425927673








