जोड़ी राम लखन की आई,
दर्शन कर लो रे नगरी का।।
राम बिना मेरी सूनी अयोध्या,
लक्ष्मण बिन ठकुराई,
सिया बिना मेरी सूनी रसोई,
कौन करे चतुराई,
दर्शन कर लो रे नगरी का,
जोडी राम लखन की आई।।
आगे आगे राम चलत है,
पीछे लक्ष्मण भाई,
बीच बीच में चले जानकी,
शोभा वर्णी न जाई,
दर्शन कर लो रे नगरी का,
जोडी राम लखन की आई।।
सावन गरजे भादो बरसे,
पवन चले पुरवाई,
एक पेड़ के नीचे भीगत,
राम लखन दोनों भाई,
दर्शन कर लो रे नगरी का,
जोडी राम लखन की आई।।
रावण मार राम घर आए,
घर घर बजे बधाई,
मत कौसल्या करे आरती,
घर घर दिवाली मनाई,
दर्शन कर लो रे नगरी का,
जोडी राम लखन की आई।।
जोड़ी राम लखन की आई,
दर्शन कर लो रे नगरी का।।
गायक – प्रेम नाथ डेगाना।
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