झुका हुआ है झुका रहेगा,
हमारा सर ये तुम्हारे आगे,
दयालु दूजा नहीं जहां में,
कन्हैया मेरे तुम्हारे आगे,
झुका हुआ हैं झुका रहेगा,
हमारा सर ये तुम्हारी आगे।।
तर्ज – तुम्हारी आंखों में हमने देखा।
भटक लिया है सारे जहां में,
ना कोई तुमसा है इस जहां में,
बेरंग लगता है ये जमाना,
कन्हैया मेरे तुम्हारे आगे,
झुका हुआ हैं झुका रहेगा,
हमारा सर ये तुम्हारे आगे।।
दातार ना कोई तुम्हारे जैसा,
जो दोगे तुम कोई ना देगा वैसा,
दानी कोई ना हुआ जहां में,
कन्हैया मेरे तुम्हारे जैसा,
झुका हुआ हैं झुका रहेगा,
हमारा सर ये तुम्हारे आगे।bd।
यूं ही ना लाखों तेरे दीवाने,
जो बात तुझ में ये वोही जाने,
“कृष्ण” को भाये कोई न दूजा,
कन्हैया मेरे तुम्हारे आगे,
झुका हुआ हैं झुका रहेगा,
हमारा सर ये तुम्हारे आगे।।
झुका हुआ है झुका रहेगा,
हमारा सर ये तुम्हारे आगे,
दयालु दूजा नहीं जहां में,
कन्हैया मेरे तुम्हारे आगे,
झुका हुआ हैं झुका रहेगा,
हमारा सर ये तुम्हारी आगे।।
स्वर – मुकेश बागड़ा जी।
प्रेषक – ओमप्रकाश पांचाल उज्जैन मध्य प्रदेश।
9926652202








