जब दुख का साया छाये,
सीताराम गाइये,
जब कुछ भी समझ ना आए,
सीताराम गाइये,
सीताराम गाइये,
सीताराम गाइये,
जब मन भारी हो जाये,
सीताराम गाइये।।
दो दिन का ये मेला है,
फिर लौट के हमें जाना है,
माया का ये जाल सारा,
झूठा ताना बाना है,
झूठा ताना बाना है,
जब ये बात समझ आ जाए,
सीताराम गाइये,
जब मन भारी हो जाए,
सीताराम गाइये।।
ये अपना कहने वाले,
अपने कहाँ होते है,
मुश्किल में सबसे पहले,
यही दूर होते है,
ओ यही दूर होते है,
जब ये अपने तुम्हे रुलाये,
सीताराम गाइये,
जब मन भारी हो जाए,
सीताराम गाइये।।
जब दुख का साया छाये,
सीताराम गाइये,
जब कुछ भी समझ ना आए,
सीताराम गाइये,
सीताराम गाइये,
सीताराम गाइये,
जब मन भारी हो जाये,
सीताराम गाइये।।
Singer – Suneel Lodhi
Composer & Lyrics – Pankaj VRK








