जब क्रोधित हो गई महाकाली,
महाकाली, महाकाली,
समझाने आये शंकर जी,
शंकर जी, शिवशंकर जी।
ऐसे गरज रही,
ऐसे बरस रही,
ऐसे गरज रही,
ऐसे बरस रही,
रक्त बीज संहारे,
हाँ रक्त बीज संहारे।
जाके हाथ में खप्पर,
और गले में डाली है मुण्डमाल,
जाके हाथ में खप्पर,
और गले में डाली है मुण्डमाल,
रूप भयंकर है महामाई,
थर्राए ये संसार, ये संसार,
जाके हाथ में खप्पर,
और गले में डाली है मुण्डमाल,
रूप भयंकर है महामाई,
थर्राए ये संसार, ये संसार।।
तर्ज – जब ज़िद पे आ गई पार्वती।
हाथ खड़ग तलवार लिए माँ,
दानव दल संहारे,
खप्पर भर भर रक्त पिए माँ,
असुरन भय से भागे।
हाथ खड़ग तलवार लिए माँ,
दानव दल संहारे,
खप्पर भर भर रक्त पिए माँ,
असुरन भय से भागे।
भेष भयानक लियो है माँ ने,
जग को भार मिटाने,
काली घटा से केश बिखेरे,
दिखे महा विकराली,
माँ दिखे महाविकराली।
ऐसे गरज रही,
ऐसे बरस रही,
ऐसे गरज रही,
ऐसे बरस रही,
रक्त बीज संहारे,
हाँ रक्त बीज संहारे।
जाके हाथ में खप्पर,
और गले में डाली है मुण्डमाल,
जाके हाथ में खप्पर,
और गले में डाली है मुण्डमाल,
रूप भयंकर है महामाई,
थर्राए ये संसार, ये संसार।।
रक्त रंगी चुनरी है तन पे,
मारत है किलकारी,
रण में कूद पड़ी महाकाली,
बाहर जीभ निकाली।
रक्त रंगी चुनरी है तन पे,
मारत है किलकारी,
रण में कूद पड़ी महाकाली,
बाहर जीभ निकाली।
ज्वाला धधक रही नैनन से,
भर लिए खप्पर खाली,
दुर्जन को संहारन आई,
हो गई है मतवाली,
माँ हो गई है मतवाली।
ऐसे गरज रही,
ऐसे बरस रही,
ऐसे गरज रही,
ऐसे बरस रही,
रक्त बीज संहारे,
हाँ रक्त बीज संहारे।
जाके हाथ में खप्पर,
और गले में डाली है मुण्डमाल,
जाके हाथ में खप्पर,
और गले में डाली है मुण्डमाल,
रूप भयंकर है महामाई,
थर्राए ये संसार, ये संसार।।
देख के माँ का रोष भयंकर,
देव लगे घबराने,
सारी सृष्टि मिट जाएगी,
अब कौन जो इन्हे संभाले।
देख के माँ का रोष भयंकर,
देव लगे घबराने,
सारी सृष्टि मिट जाएगी,
अब कौन जो इन्हे संभाले।
शंकर जी धरती पर आकर,
लेट गए चुपचाप,
माँ के चरण पड़े जब उन पर,
थम गया सारा ताप,
माँ का थम गया सारा ताप।
ऐसे गरज रही,
ऐसे बरस रही,
ऐसे गरज रही,
ऐसे बरस रही,
रक्त बीज संहारे,
हाँ रक्त बीज संहारे।
जाके हाथ में खप्पर,
और गले में डाली है मुण्डमाल,
जाके हाथ में खप्पर,
और गले में डाली है मुण्डमाल,
रूप भयंकर है महामाई,
थर्राए ये संसार, ये संसार।।
जब क्रोधित हो गई महाकाली,
महाकाली, महाकाली,
समझाने आये शंकर जी,
शंकर जी, शिवशंकर जी।
ऐसे गरज रही,
ऐसे बरस रही,
ऐसे गरज रही,
ऐसे बरस रही,
रक्त बीज संहारे,
हाँ रक्त बीज संहारे।
जाके हाथ में खप्पर,
और गले में डाली है मुण्डमाल,
जाके हाथ में खप्पर,
और गले में डाली है मुण्डमाल,
रूप भयंकर है महामाई,
थर्राए ये संसार, ये संसार,
जाके हाथ में खप्पर,
और गले में डाली है मुण्डमाल,
रूप भयंकर है महामाई,
थर्राए ये संसार, ये संसार।।
🎤 Singer – Shekhar Mourya
✍️ Lyrics – Shekhar Mourya








