लोग कहेला तू ज्ञान के,
भंडार मैया जी,
हाथे वीणा बा धइले,
हमार मैया जी।।
तर्ज – काहे नथिया गढवल उधार।
कला संस्कृति माई,
रउए से आला,
जीवन अन्हार बाटे,
करी द उजाला,
सोहे माथे मुकुट,
गले हार मैया जी,
हाथे वीणा बा धइलें,
हमार मैया जी।।
बुद्धि आ ज्ञान रउए,
दर पे भेटाला,
खाली ना जाई तोहर,
बात बा निराला,
श्वेत वस्त्र हंस पे,
सवार मैया जी,
हाथे वीणा बा धइलें,
हमार मैया जी।।
लोग कहेला तू ज्ञान के,
भंडार मैया जी,
हाथे वीणा बा धइले,
हमार मैया जी।।
गायक – विद्याकान्त झा।
9931244994
रचनाकार – श्री सूर्यकांत झा।








