हंस हंस पूछे भेरू मनडे री बातां भेरू जगदम्बा संवाद लीरिक्स

हंस हंस पूछे भेरू,

दोहा – हाथ जोड़ विनती करूं,
सुण जो ध्यान लगाय,
आधे हेले आवजो,
भेगी सुण जो पुकार।



हंस हंस पूछे भेरू रे,

मनडे री बातां भेरू,
मनडे री बातां भेरू,
मनडे री बाताँ हो भेरू,
मनडे री बातां हो राज।।



हा जी कद का थे,

शक्ति भवानी ओ माय,
हा जी कद का थे शक्ति,
भवानी ओ माय।
जद नहीं होता भेरू रे,
सूरज चन्दा भेरू,
सूरज चन्दा भेरू,
सूरज चन्दा ओ भेरू,
सूरज चन्दा ओ राज,
अजी जद की मैं,
शक्ति भवानी ओ राज।।



हा जी कद का थे,

शक्ति भवानी ओ माय,
हा जी कद का थे शक्ति,
भवानी ओ माय।
जद नहीं होता भेरू रे,
नवलख तारा भेरू,
नवलख तारा भेरू,
नवलख तारा ओ हो,
ओ हा रे भेरू,
नवलख तारा ओ राज।
अजी जद की मैं शक्ति,
भवानी ओ राज।।



हा जी कद का थे,

शक्ति भवानी ओ माय,
हा जी कद का थे शक्ति,
भवानी ओ माय।
जद नहीं होता भेरू रे,
पवन और पाणी भेरू,
पवन और पाणी भेरू,
पवन और पाणी ओ हो,
ओ हा रे भेरू,
पवन और पाणी ओ राज।
अजी जद की मैं शक्ति,
भवानी ओ राज।।



हा जी कद का थे,

शक्ति भवानी ओ माय,
हा जी कद का थे शक्ति,
भवानी ओ माय।
जद नहीं होता भेरू रे,
ब्रह्मा और विष्णु भेरू,
ब्रह्मा और विष्णु भेरू,
ब्रह्मा औऱ विष्णु ओ हो,
ओ हा रे भेरू,
ब्रह्मा औऱ विष्णु हो राज।
अजी जद की मैं शक्ति,
भवानी ओ राज।।



धन्नो भगत मैया,

थारो जस गावे भवानी,
थारो जस गावे,
थारो जस गावे ओ हो,
ओ हा रे मैया,
थारो जस गावे ओ राज।
म्हारी अटकी नैया पार,
तो लगावो ओ राज,
म्हारी अटकी नैया,
पार तो लगावो ओ राज।।



हँस हँस पूछे भेरू,

मनडे री बातां भेरू,
मनडे री बातां भेरू,
मनडे री बाताँ हो भेरू,
मनडे री बातां हो राज।।

स्वर – सुनीता जी स्वामी।
प्रेषक – रामेश्वर लाल पँवार।
आकाशवाणी सिंगर।
9785126052