ज्ञान सतगुरु समझायो ए,
तत्वमसी महावाक्य सनाकर,
भ्रम मिटायो ए।।
सुपने सुती नार सुहागण,
बालक गमायो ए,
जागी नींद प्राप्त बालक,
गोद खिलायो ए।।
ज्यूं किस्तुरी कुरंग नभ माही,
फिर बन भटकायो ए,
गुरु बिना सार समझ नही पावे,
कौन बतावे ए।।
तील में तेल पत्थर में अग्नि,
महेन्दी रंग छायो ए,
दुध मे घिरत पुष्प में खूशबू,
यूं हर छायो ए।।
बालक नाथ मिल्या गुरु पुरा,
सब द्वेष मिटायो ए,
निर्भयनाथ भयो अब निर्भय,
आनन्द आयो ए।।
ज्ञान सतगुरु समझायो ए,
तत्वमसी महावाक्य सनाकर,
भ्रम मिटायो ए।।
गायक – सहीराम भाट सूरतगढ़।
प्रेषक – समुन्द्र चेलासरी।
मो.- 8107115329








