दिलदार सांवरिया ने,
क्या रंग चढ़ाया है,
भाव भजन सुमिरन,
सेवा में लगाया है।।
तर्ज – बचपन की मोहब्बत को।
कब क्या कुछ होना है,
सब उनकी मर्जी है,
सत्कर्म हो जीवन में,
बस इतनी अर्जी है,
कोई दाग न लग जाए,
जो रंग चढ़ाया है,
भाव भजन सुमिरन,
सेवा में लगाया है।।
होठों पर नाम तेरा,
चित्त में बस ध्यान तेरा,
नित भजन करूं तेरा,
ये कर्म हो बस मेरा,
मन रमा जो दुनिया में,
सब तेरी माया है,
भाव भजन सुमिरन,
सेवा में लगाया है।।
गर भाव मेरे सच्चे,
प्रभु दर्शन दिखलाओ,
नैनो से नैन मिला,
मुझे गले से लगा जाओ,
‘राजभारती’ कहे सर्वस्व,
चरणों में चढ़ाया है,
भाव भजन सुमिरन,
सेवा में लगाया है।।
दिलदार सांवरिया ने,
क्या रंग चढ़ाया है,
भाव भजन सुमिरन,
सेवा में लगाया है।।
प्रेषक – ओम प्रकाश पंचाल उज्जैन मध्य प्रदेश।
99266 52202








