शरण तेरी आन पड़ा,
बाबा मोहन राम,
फसी भवन में मेरी नैया,
पार करो घनश्याम।।
ब्रह्मा विष्णु शिव शंकर भी,
तेरी टहल बजावे,
इन्द्राणी, ब्रहमाणी लक्ष्मी,
गोरा साथ निभावे,
स्वर्ग लोक तक धूम मची,
तेरा सच्चा खोली धाम,
शरण तेरी आन पडा,
बाबा मोहन राम।।
मतलब की दुनिया ने दिखाया,
मुझ को झूठा सपना,
आंख खुली तो समझ में आया,
यहाँ नहीं कोई अपना,
अंधकार से मुझे ऊबारो,
बंईया लो मेरी थाम,
शरण तेरी आन पडा,
बाबा मोहन राम।।
निराकार साकार तू ही,
कण कण में तेरा वासा,
दीन हीन लाचार हूँ बाबा,
कर मेरा विव्वासा,
तेरी लगन में मगन रहूँ मै,
येही मेरा काम,
शरण तेरी आन पडा,
बाबा मोहन राम।।
धर्म का सच्चा कर्म का अच्छा,
मैं बालक हूँ तेरा,
सुरेन्द्र सिंह बस इतना चाहे,
भाग्य उदय हो मेरा,
नितिन पाल तेरा दास रहूँगा,
चाहे जो भी हो अंजाम,
शरण तेरी आन पडा,
बाबा मोहन राम।।
शरण तेरी आन पड़ा,
बाबा मोहन राम,
फसी भवन में मेरी नैया,
पार करो घनश्याम।।
गायक – सुरेन्द्र सिंह निठौरा।
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