दिवानों की महफिल है,
दिवानें ही आते है,
खाटु में ग्यारस की,
हाजरी लगाते है।।
तर्ज – दिल पे जख्म खाते है।
घर से निकलते है,
सांवरे से मिलने को,
खाटु पहूँचते ही,
सिधे दर्शन को जाते है,
दिवानो की महफिल है,
दिवाने ही आते है।।
भुख इन्हे भजनों की,
प्यास दर्शन की रहे,
श्याम के झलक पाकर,
भुख प्यास मिट जाते है,
दिवानो की महफिल है,
दिवाने ही आते है।।
श्रृंगार प्यारा है,
मन को लुभाता है,
बांकी अदाओं पे,
दिल हार जाते है,
दिवानो की महफिल है,
दिवाने ही आते है।।
बाबा से कहेंगे दिल की,
आते है यही सोचकर,
पग चौखट पे रखते ही,
सब कुछ भुल जाते है,
दिवानो की महफिल है,
दिवाने ही आते है।।
श्याम के दिवानों का,
कही और ना ठिकाना है,
पुछो ज़रा इनसे,
सभी खाटु बताते है,
दिवानो की महफिल है,
दिवाने ही आते है।।
दिवानों की महफिल है,
दिवानें ही आते है,
खाटु में ग्यारस की,
हाजरी लगाते है।।
Singer / Writer – Kailash Sharma
9608722111








