दादा को निहारूँ,
जीवन सँवारुं,
नाकोड़ा के दर पे बैठके बैठके,
नाकोड़ा के दर पे बैठके बैठके,
नाकोड़ा के दर पे बैठके,
नाकोड़ा जी आऊँ,
भक्ति में खो जाँऊ,
चरणों में इनके बैठके बैठके,
चरणों मे इनके बैठके।।
तर्ज – चाँद को निहारूँ।
मुझको यहाँपर आकर के,
जीवन का आनन्द मिले,
दादा के दर्शन पाकर के,
मिट जाये ये फासले,
पूनम जो आती,
दादा को रिझाते है,
प्रभु मिलन का है जोग,
रिस्ता ये पावन है,
प्रीत का बंधन है,
इसलिए आते है लोग,
बड़ा सुख पाया,
प्रीत ये लगाके,
सब कुछ मिला है,
खोले बिन जुबाके,
नाकोड़ा के दर पे बैठके बैठके,
नाकोड़ा के दर पे बैठके।।
नाकोड़ा का नाथ है मेरा,
हरपल देता साथ है मेरा,
हाथ ये मेने बड़ा दिया है,
कभी न छोड़े हाथ ये मेरा,
मन नही भरता नाकोड़ा जी आके,
इतना आनंद है भर गई आँखे,
जीवन तुमको सौंप दिया है,
भक्तो का बस तुम्ही ही सहारा,
मिट गए सब गम,
तेरे दर पे आके,
अब चेन आया,
प्रभु तुमको पाके,
चरणों में इनके बैठके बैठके,
चरणों मे इनके बैठके।।
दादा को निहारूँ,
जीवन सँवारुं,
नाकोड़ा के दर पे बैठके बैठके,
नाकोड़ा के दर पे बैठके बैठके,
नाकोड़ा के दर पे बैठके,
नाकोड़ा जी आऊँ,
भक्ति में खो जाँऊ,
चरणों में इनके बैठके बैठके,
चरणों मे इनके बैठके।।
गायक – किशन गोयल / अहाना बालोतरा।
रचनाकार – दिलीप सिंह सिसोदिया ‘दिलबर’
नागदा जक्शन म.प्र.
मो. 9907023365








