चेतन ही मम जाण्यो चेतन,
श्योम अथायो ए,
अब निज आनन्द आयो ए।।
रजू में सर्प भयो रजनी में,
मिथ्या डर पायो ए,
रजू तो रजू देख्यो रवि करके,
भ्रम नसायो ए,
अब निज आनन्द आयो ए।।
कर को कंगण पुछत ढोल्यो,
भूल भूलायो ए,
मे ही तन पट दुर कियो,
फिर कंगण पायो ए,
अब निज आनन्द आयो ए।।
सुपने सुती नार सुहागण,
बालक गमायो ए,
भाग्यो सुपनो जागी सुध चेतन,
शिशु दर्सायो ए,
अब निज आनन्द आयो ए।।
अपनो आप चित घन चेतन,
नित निर्दायो ए श्यो मलूक,
मलूक निजानन्द,
विमल अजायो ए,
अब निज आनन्द आयो ए।।
चेतन ही मम जाण्यो चेतन,
श्योम अथायो ए,
अब निज आनन्द आयो ए।।
गायक – सहीराम भाट सूरतगढ़।
प्रेषक – समुन्द्र चेलासरी।
मो.- 8107115329








