चाँदनी चौदस री रे रात माताजी,
चांदनी चौदस ने वाली रात,
भगतो रे बुलाया,
जमुवाय आवजो रे ए जी हा।।
रामगढ़ मे बनीयो रे धाम,
माताजी रो रामगढ़ में,
बनीयो मोटो धाम,
ऊंचे रे आसन जमुवाय मां,
बिराजीया रे ए जी हां।।
ढोल नगाड़ा बाजे थारे द्वार,
माताजी ढोल नगाड़ा,
बाजे मन्दिर माय,
आरतियां री वेला,
वेगा आवजो रे ए जी हा।।
कलयुग माई परचा अपरम्पार,
माताजी रा कलयुग माई,
परचा अपरम्पार,
जमुवाय मां कहीजे,
जग री जोगनी रे ए जी हा।।
आया आया भगत थारे द्वार,
माताजी आया आया,
भगत थारे द्वार,
आयोडा भगतो पर,
छाया राखजो रे ए जी हा।।
कच्छुवा वंश री,
कुल धनीयानी मात,
भवानी कच्छुवा वंश री,
कुलदेवी म्हारी मात,
भगत मनावे घणा,
भाव सु रे ए जी हा।।
*किशोर नीरु*,
भगत चरना माय,
माताजी *रावरीया* परिवार,
चरना माय,
जमुवाय मां भगतो री लजीया,
राखजो रे ए जी हा,
*मनीष सीरवी रायपुर* वालों,
दीनो भजन बनाय,
माताजी टाबर थारे,
आयो चरना माय,
*अशोक चौहान* भाव सु,
गावीया रे ए जी हा।।
चाँदनी चौदस री रे रात माताजी,
चांदनी चौदस ने वाली रात,
भगतो रे बुलाया,
जमुवाय आवजो रे ए जी हा।।
गायक – अशोक जी चौहान व दिव्या जी चौहान।
लेखक – मनीष सीरवी।
रायपुर जिला ब्यावर राजस्थान।








