जय शंकर कैलाशपति शिव भजन लिरिक्स
जय शंकर कैलाशपति शिव, पूरण ब्रम्ह सदा अविनाशी, पूरण ब्रम्ह सदा अविनाशी, जय शंकर कैलाश पति शिव।। अंग विभूति गले...
Read moreDetailsजय शंकर कैलाशपति शिव, पूरण ब्रम्ह सदा अविनाशी, पूरण ब्रम्ह सदा अविनाशी, जय शंकर कैलाश पति शिव।। अंग विभूति गले...
Read moreDetailsजिंदगी सुधार बंदा, यही तेरो काम है।। मानुष की देह पाई, हरि से ना प्रीत लाई, विषयों के जाल माही,...
Read moreDetailsशंकर तेरी जटा में, बहती है गंग धारा, काली घटा के अंदर, जिम दामिनी उजारा, भोले तेरी जटा में, बहती...
Read moreDetailsचलो चलो सखी अब जाना, हरि भेज दिया परवाना।। एक दूत जबर चल आया, सब लश्कर लाव मंगाया, किया बीच...
Read moreDetailsकरो हरि का भजन प्यारे, उमरिया बीती जाती है।। तर्ज - दशा मुझे दीन की। पूरब शुभ कर्म कर आया,...
Read moreDetailsमुसाफिर जागते रहना, नगर में चोर आते है, जरा सी नींद गफलत में, झपट गठरी उठाते है, मुसाफिर जागतें रहना,...
Read moreDetailsऐसी करी गुरुदेव दया, मेरे मोह का बन्धन तोड़ दिया।। दौड़ रहा दिन रात सदा, जग के सब कार बिहारन...
Read moreDetailsजतन कर आपणा प्यारे, कर्म की आस नहीं कीजे।। मानुस की देह है गुणकारी, अक्ल पशुओं से है न्यारी, वो...
Read moreDetailsमैं तो रमता जोगी राम, मेरा क्या दुनिया से काम, मैं तो रमता जोगी राम।bd। हाड़ माँस की बनी पुतलिया,...
Read moreDetailsईश्वर तेरे दरबार की, महिमा अपार है, बंदा न सके जान, तेरा क्या बिचार है, ईंश्वर तेरे दरबार की, महिमा...
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