बिनज करन ने नगर रूनीचे लाखु बिन्जारो आयो

बिनज करन ने नगर रूनीचे,
लाखु बिन्जारो आयो,
कुनदीया भर भर बालद में,
मिसरी ओ ले आयो,
रूनीचा रा चोवटीया मे,
लाखु हाट मंडाई है,
रामदेवजी पुछ्यो उनने ओ,
रामदेवजी पुछ्यो उनने,
बिन्जारा तू काई लायो,
थाने तो पूजे राजस्थान जियो,
गुजरात जियो,
ओ खम्मा घणी घणी खम्मा,
राजा रामसापीर ने,
घणी घणी खम्मा राजा रामसापीर ने।।



चूंगीया डर सु बिन्जारो,

झूठी बाता बतलाई,
बेचन सारू लूण है लायो,
अनदाता कुनदी माई,
झूठ बोलीयो बिन्जारो जद,
बाबो परचो दिखलायो,
बिन्जारा री मिसरी ने जद,
बिन्जारा री मिसरी ने जद,
बाबो लूण बनाय दीयो,
थाने तो पूजे राजस्थान जियो,
गुजरात जियो,
ओ खम्मा घणी घणी खम्मा,
राजा रामसापीर ने,
घणी घणी खम्मा राजा रामसापीर ने।।



लोग लुगाया खाई जद सब,

थू थू कर थूकन लागा,
लूण है लाखु कुनदीया मे,
सगला यु केवन लागा,
सारी मिसरी लूण बन गई,
लाखु मन में घबरायो,
हाथ जोडकर करे विनती,
हाथ जोडकर करे विनती,
बाबा रे शरने आयो,
थाने तो पूजे राजस्थान जियो,
गुजरात जियो,
ओ खम्मा घणी घणी खम्मा,
राजा रामसापीर ने,
घणी घणी खम्मा राजा रामसापीर ने।।



पाछी मिसरी करने बाबो,

बिन्जारा रो कष्ट हर्यो,
आंसूडा ढलकावे लाखु,
रामदेव रे चरण पड्यो,
झूठ कपट मत करजे लाखु,
बाबो सीख दिलाई है,
देख्यो परचो अलख धणी रो,
देख्यो परचो अलख धणी रो,
सगला अचरज कर लायो,
थाने तो पूजे राजस्थान जियो,
गुजरात जियो,
ओ खम्मा घणी घणी खम्मा,
राजा रामसापीर ने,
घणी घणी खम्मा राजा रामसापीर ने।।



बिनज करन ने नगर रूनीचे,

लाखु बिन्जारो आयो,
कुनदीया भर भर बालद में,
मिसरी ओ ले आयो,
रूनीचा रा चोवटीया मे,
लाखु हाट मंडाई है,
रामदेवजी पुछ्यो उनने ओ,
रामदेवजी पुछ्यो उनने,
बिन्जारा तू काई लायो,
थाने तो पूजे राजस्थान जियो,
गुजरात जियो,
ओ खम्मा घणी घणी खम्मा,
राजा रामसापीर ने,
घणी घणी खम्मा राजा रामसापीर ने।।

गायक – प्रकाश माली जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
9640557818


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