भोला बाबा को लाग्यो दरबार रस की बूँदा पडे

भोला बाबा को लाग्यो दरबार,
रस की बूँदा पडे,
बूँदा पड़े रे बाबा बूँदा पड़े,
म्हारा बाबा को लाग्यो दरबार,
रस की बूँदा पड़े।।



सरवरिया री पाल निराली,

मंदरिया में मूर्त प्यारी,
भोला बाबा नाडिया पे सवार,
रस की बूँदा पडे,
बूँदा पड़े रे बाबा बूँदा पड़े,
म्हारा बाबा को लाग्यो दरबार,
रस की बूँदा पड़े।।



थारे चौदस मावस मेलो लागे,

है जी मंदरिया में भीड़ न मावे,
ज्यांकी लीला तो बड़ी अपार,
रस की बूँदा पडे,
बूँदा पड़े रे बाबा बूँदा पड़े,
म्हारा बाबा को लाग्यो दरबार,
रस की बूँदा पड़े।।



(Dj नाम) तगड़ो बाजे,

चेतन सैनी भजन बनावे,
(कोई भी नाम)तगड़ो नाम,
रस की बूँदा पडे,
बूँदा पड़े रे बाबा बूँदा पड़े,
म्हारा बाबा को लाग्यो दरबार,
रस की बूँदा पड़े।।



भोला बाबा को लाग्यो दरबार,

रस की बूँदा पडे,
बूँदा पड़े रे बाबा बूँदा पड़े,
म्हारा बाबा को लाग्यो दरबार,
रस की बूँदा पड़े।।

गायक – चेतन सैनी।
प्रेषक – रामस्वरूप लववंशी
सालरखोह हरनावदा शाहजी
8107512667


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