जय जय जनक सुनन्दिनी हरि वन्दिनी हे आरती लिरिक्स
जय जय जनक सुनन्दिनी, हरि वन्दिनी हे, दुष्ट निकंदिनि मात, जय जय विष्णु प्रिये।। सकल मनोरथ दायनी, जग सोहिनी हे,...
जय जय जनक सुनन्दिनी, हरि वन्दिनी हे, दुष्ट निकंदिनि मात, जय जय विष्णु प्रिये।। सकल मनोरथ दायनी, जग सोहिनी हे,...
नौ दुर्गा की नौ रात सुहानी, घर घर मे पुजे तोखे अम्बे भवानी।। सुबह शाम मैय्या थारी आरती उतारा, आरती...
खम्मा खम्मा आई माता, थारो देवरो ए माँ, ओ खम्मा खम्मा आईं माता, थारो देवरो ए माँ, म्हाने टाबरिया जाणे...
कचरो छा गयो रे कर्मो पे, कैसे काटे दुखड़ो। दोहा - कबीर कमाई आपणी, कबू न निष्फल जाय, सात समद...
भजन बिना जावेगा रे रोता, दोहा - आया था किस काम से, थू सोया चादर ताण, एक दिन ऐसा सोयेगा,...
मन रे राम भजन कर गेला रे, थने सतगुरु देवे हेला रे।। दिवस गमायो कमायो खायो, ज्यू घाणी का बैला...
सजा दो दर को फूलों से, माँ का नवरात आया है, सम्पदा कीर्ति यश वैभव, व सुख समृद्धि लाया है,...
माँ दिल के इतने करीब है तू, जिधर भी देखूं नज़र तू आए, जो आँखे बंद करके माँ मैं देखूं,...
हर बार तेरे दर पे, नव गीत सुनाएंगे, ढांढण वाली सुन ले, तेरी महिमा गाएंगे, हर बार तेरे दर पें,...
तेरा श्याम तो तेरे ही, घर के मंदिर में बैठा, तू क्यों रोता है बेटा, मंदिर बंद है तो क्या, तेरा...
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