अपने श्याम कन्हैया को देखूँ बिना पलक झपकाये भजन लिरिक्स

अपने श्याम कन्हैया को,
देखूँ बिना पलक झपकाये,
इन अँखियों की डिब्बियां के ढक्कण,
इन अँखियों की डिब्बियां के ढक्कण,
टूट टूट गिर जाये,
अपने श्याम कन्हैंया को,
देखूँ बिना पलक झपकाये।।



बार बार ढक्कण गिरते हैं कान्हा,

परेशान दिल को करते हैं कान्हा,
डर लगता है पलक झपकते,
श्याम चला ना जाये,
अपने श्याम कन्हैंया को,
देखूँ बिना पलक झपकाये।।



रक्खो ये नैणा तब तक मिलाये,

बांकी छवि ना इनमें जब तक समाये,
सुणा है इन नैनों के ज़रिये,
दिल से दिल टकराये,
अपने श्याम कन्हैंया को,
देखूँ बिना पलक झपकाये।।



खुले रहते हैं हरदम ढक्कण तुम्हारे,

अगर एक छण भी गिरते ढक्कण हमारे,
चाहे अखियाँ फुट जाये पर,
पर ऐसा दिन ना दिखाये,
अपने श्याम कन्हैंया को,
देखूँ बिना पलक झपकाये।।



‘बनवारी’ नैणा मिलाते मिलाते,

अँखियों में सूरत समाते समाते,
‘बनवारी’ जो कभी गिरे ना,
वो ढक्कण लग जाये,
अपने श्याम कन्हैंया को,
देखूँ बिना पलक झपकाये।।



अपने श्याम कन्हैया को,

देखूँ बिना पलक झपकाये,
इन अँखियों की डिब्बियां के ढक्कण,
इन अँखियों की डिब्बियां के ढक्कण,
टूट टूट गिर जाये,
अपने श्याम कन्हैंया को,
देखूँ बिना पलक झपकाये।।

गायक / लेखक – श्री जय शंकर चौधरी जी।
प्रेषक – अंकुर अग्रवाल।
9837363800


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