संत श्री अणदारामजी री कथा प्रथम भाग

संत श्री अणदारामजी री कथा प्रथम भाग,

दोहा – सतगुरु दीनदयाल को,
और विनती बारम्बार,
अरे काग पलट हंंसा किया,
गुरू करता नी लाया भाग।
१७२९ में छायो आनंद नाम,
गुरू अणदारामजी प्रगटीया,
धिन धोराजी धाम।



प्रथम देव गणपति ने सिवरू,

माँ सरस्वती को निवन कियो,
हरि हर रूप गुरासा ने सिवरू,
कथा रे केवन रो मतो रे कियो,
ए अणदारामजी री गावु मै वार्ता,
अणदोजी सोनी री गावु मै वार्ता,
हरि रा भजन मे आनंद लियो,
ए सोनी कुल सिरमौर गुरासा,
ए गाँव मोदरा मे जन्म लियो,
महर कराई अणदोजी सोनी,
अवतारण रो मंत्र दीयो,
राम ने सुमर थारी सुधरेला काया,
राम ने सुमर थारी सुधरेला काया,
जो सुमरिया वो पार हुयो,
राख विश्वास भरोसो भारी,
अणदारामजी री महिमा आ भारी।।



जिला जामनगर गाँव धोराजी,

सोनी कुल मे प्रकाश हुवो,
अमृत बूंदा अनहद बरसी,
बिजलीया आकाश प्रकाश कियो,
हरि रो अंश धरती पर आयो,
हरि रो अंश धरती पर आयो,
राम नाम संग मुखीयो लियो,
राम ने सुमर थारी सुधरेला काया,
राम ने सुमर थारी सुधरेला काया,
जो सुमरिया वो पार हुयो,
राख विश्वास भरोसो भारी,
अणदारामजी री महिमा आ भारी।।



संवत १७२९ सोवनी,

पूरी रे पूनम रो जन्म हुवो,
आषाढ़ महीने इन्द्र गाजीयो,
अमृत कुल मे जन्म लियो ,
अश्विनी नक्षत्र में जामो जी पायो,
अश्विनी नक्षत्र में जामो जी पायो,
सोने रो सूरज प्रकाश हुवो,
राम ने सुमर थारी सुधरेला काया,
राम ने सुमर थारी सुधरेला काया,
जो सुमरिया वो पार हुयो,
राख विश्वास भरोसो भारी,
अणदारामजी री महिमा आ भारी।।



घर घर गुड़ डलीया ने बंटायो,

सखीया तो मंगला गाई रयो,
जोशी आयने टिपनो जी बाच्यो,
आनंद भाई नाम दिराय दीयो,
सोनी कुल मे सोना रो सूरज,
सोनी कुल मे सोना रो सूरज,
धिन धिन संत अवतार लियो,
राम ने सुमर थारी सुधरेला काया,
राम ने सुमर थारी सुधरेला काया,
जो सुमरिया वो पार हुयो,
राख विश्वास भरोसो भारी,
अणदारामजी री महिमा आ भारी।।



पुत्र रा पगल्या तो पालना मे दिखे,

राम नाम रट लाय रयो,
साथीडा री संगत छोडी अणदोजी,
अरे एकांत मनडो लगाय दियो,
ए हरि रे नाम री आ डोरी लगावे,
हरि रे नाम री डोरी लगावे,
हरि गुण मंगला गाई रयो,
राम ने सुमर थारी सुधरेला काया,
राम ने सुमर थारी सुधरेला काया,
जो सुमरिया वो पार हुयो,
राख विश्वास भरोसो भारी,
अणदारामजी री महिमा आ भारी।।



बालपना मे एक घटना जी,

घट गई मात पिता रो हाथ सिर सु गयो,
ए लागी रे लिवना हरि रे नाम री,
बारह वर्ष मे घर ने छोड़ दियो,
आया साधु संत एक दिन गाँव में,
आया साधु संत एक दिन गाँव में,
भक्ति करन रो मनडो हुवो,
राम ने सुमर थारी सुधरेला काया,
राम ने सुमर थारी सुधरेला काया,
जो सुमरिया वो पार हुयो,
राख विश्वास भरोसो भारी,
अणदारामजी री महिमा आ भारी।।

गायक – श्याम पालीवाल जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
9640557818


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