आपरे दर्शन कारण हो,
कूबड़ माँ बालेरा आया हो,
दर्शन देवो क्योनी हो,
कूबड़ माँ कोहिहट जेलि हो।।
आपरो गढ़ रे बावतरा में धाम,
कूबड़ माँ जोता जागे हो,
हो बैठा खेतलाजी रे संग,
राजगुरु शरणे आवे हो।।
आपरे श्रृंगार कारण हो,
कूबड़ माँ छेवरा लाया हो,
हो छेवरो पेहरो क्योनी हो,
कूबड़ माँ कोई हट जेलि हो,
हो थोरा दर्शन कारण हो,
कूबड़ माँ बावतरा सू पैदल आया हो।।
हो दर्शन देवो क्योनी हो,
कूबड़ माँ कोई हट जेलि हो,
हो आपरे ओढ़न कारण हो,
माताजी महेन्द्रसिंह चुनड़ी लाया हो,
हो चुनड़ी ओढ़ो क्योनी हो,
कूबड़ माँ कोई हट जेलि हो।।
ओ तो महेन्द्र राजगुरु हो,
कूबड़ माँ रो भजन बनायो सा,
हो बावतरा शरणे आवे हो,
कूबड़ माँ रा दर्शन पाया हो,
हो आया बावतरा रे माई,
लागू खेतलाजी रे पाव,
कूबड़ माँ कोई हट जेलि हो।।
आपरे दर्शन कारण हो,
कूबड़ माँ बालेरा आया हो,
दर्शन देवो क्योनी हो,
कूबड़ माँ कोहिहट जेलि हो।।
Singer – Jhumka Ji Gehlot
लेखक – महेन्द्र सिंह बावतरा।
मो. 8503831005








