आओ ज्योत पे माँ काली,
बणकै भगतां की रखवाली,
तेरा तो होया भगत मजबूर,
कालका कर संकट नै दूर,
कालका कर संकट नै दूर।।
तर्ज – ल्याऊ पार्वती का डोला।
इस संकट न आंख दिखाई,
इतनी क्यूं मां देर लगाई,
इस संकट का करो सफाया,
मैं तो तेरी शरण में आया,
री मां तनै आणा पड़े जरूर,
कालका कर संकट नै दूर,
कालका कर संकट नै दूर।।
इस संकट प चलैगी कटारी,
फेर मारैगा यू किलकारी,
इसकी करदे न मां ढेरी,
भर ले खप्पर री जो लेरी,
तोड़ दे इस संकट का गरुर,
कालका कर संकट नै दूर,
कालका कर संकट नै दूर।।
सब देवों ने तुझे री पुकारया,
ना चाल्या था जब कोई चारा,
तनै रक्तबीज को मारया,
और चण्ड मुंड को संहारा,
री तेरी करी भगति भरपूर,
कालका कर संकट नै दूर,
कालका कर संकट नै दूर।।
गुरु राजेन्द्र तनै री बुलावै,
तेरे चरणों म महिमा गावै,
यू तो आवै सुनील कुमार,
कररया विनती बारम्बार,
चढ़या स तेरे री नाम का सरूर,
कालका कर संकट नै दूर,
कालका कर संकट नै दूर।।
आओ ज्योत पे माँ काली,
बणकै भगतां की रखवाली,
तेरा तो होया भगत मजबूर,
कालका कर संकट नै दूर,
कालका कर संकट नै दूर।।
गायक & लेखक – सुनील कुमार लदानियां।
99961-23336








