आई माता रा रथड़ा आया,
भक्तों वाली पोळ।
दोहा – आईमाता आविया,
भक्तो वाली बेल,
इण कलयुग मायने,
गजब रचायो खेल।
गजब रचायो खेल,
मैं टाबर भोला डाला,
आई मां मममाय भवानी,
अम्बापुर धनीयाणी,
कारज सार दीजो मारा।
आई माता रा रथड़ा आया,
भक्तों वाली पोळ,
रातोड़ो गुलाल उड़े
गैरो बाजे ढोल।।
रथड़े वाला घूंघरिया,
बाजे घणा जोर,
मीठा बोले मोरिया न,
कोयलिङी रो शोर,
आईमाता रा रथडा आया,
भक्तो वाळी पोल,
रातोड़ो गुलाल उड़े
गैरो बाजे ढोल।।
जीमो मारा आईजी,
चुरमिया को भोग,
मोटा मारा भाग मावड़ी,
थो मिलने रो जोग,
आईमाता रा रथडा आया,
भक्तो वाळी पोल,
रातोड़ो गुलाल उड़े
गैरो बाजे ढोल।।
तारों वाली चुनड़ी ने,
हिरा जङियो हार,
भक्तो वाली मावङी मां,
कर दीजो थे पार,
आईमाता रा रथडा आया,
भक्तो वाळी पोल,
रातोड़ो गुलाल उड़े
गैरो बाजे ढोल।।
मंगलसिंह री लेखणी ने,
थोरोङे दरबार,
भक्त मन्डल ओ गावे मईया,
करजो बेड़ा पार,
आईमाता रा रथडा आया,
भक्तो वाळी पोल,
रातोड़ो गुलाल उड़े
गैरो बाजे ढोल।।
गायक – महावीर जी सांखला।
प्रेषक – महेन्द्रकुमार सीरवी।
9448014387








