तेरी चोखट पे खड़ा है नादान,
भरोसा तेरा श्याम धनी,
मेरे कष्टों से बनो ना अनजान,
भरोसा तेरा श्याम धनी।।
तर्ज – मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान।
आस लगाये खड़ा भिखारी,
झोली तुम भर देना,
दीन दुखी की सुनते हो तुम,
मेरी भी सुन लेना,
मैंने सबसे सुना हो दयावान,
भरोसा तेरा श्याम धणी।।
रिश्ते नाते सब स्वारथ के,
मैंने है अब जाना,
तेरे सिवा ना कोई जगत में,
मेरा श्याम ठिकाना,
रख लो मेरे भी आँसुओं का मान,
भरोसा तेरा श्याम धणी।।
नैया मेरी फंसी भंवर में,
अब तो पार लगाओ,
हारे के साथी बनकर के,
बाबा लाज बचाओ,
अब तो संकट में फसे है मेरे प्राण,
भरोसा तेरा श्याम धणी।।
शीश के दानी खाटू वाले,
तेरी महिमा जानू,
तेरे दर पे शीश झुकाऊँ,
तुमको अपना मानु,
करता ‘अनुज’ है तेरा गुणगान,
भरोसा तेरा श्याम धणी।।
तेरी चोखट पे खड़ा है नादान,
भरोसा तेरा श्याम धनी,
मेरे कष्टों से बनो ना अनजान,
भरोसा तेरा श्याम धनी।।
गायक – आरव अग्रवाल।
लेखक – अनुज जैन।








