गर होता पंछी मैं बाबा,
भरता ऐसी उड़ान मैं,
जब भी मन होता आ जाता,
उड़कर खाटू धाम में।।
तर्ज – चाँद सितारें फूल और।
तेरे आँगन की ओ बाबा,
उड़-उड़ के धूल उड़ाता मैं,
अपने पंखों का चँवर बनाकर,
निशदिन चँवर ढुलाता मैं,
बागों से फूलड़े चुन तेरा,
बागों से फूलड़े चुन तेरा,
गजरा बनाता श्याम मैं,
जब भी मन होता आ जाता,
उड़कर खाटू धाम में।।
ना धन की चिंता होती मुझे,
ना फ़िक्रें होती काम की,
बस एक लगन में खो जाता,
‘गोलू’ बस श्याम के नाम की,
दाना पानी भूल के उड़ता,
दाना पानी भूल के उड़ता,
सुनकर तेरा नाम मैं,
जब भी मन होता आ जाता,
उड़कर खाटू धाम में।।
(Additional)
चाहे आँधी आए राहों में,
या मौसम हो तूफ़ान का,
तेरे नाम के पंख लगा बाबा,
मुझे डर कैसा आसमान का,
नील गगन में उड़ते-उड़ते हो,
नील गगन में उड़ते-उड़ते,
गाता तेरा गुणगान मैं,
जब भी मन होता आ जाता,
उड़कर खाटू धाम में।।
गर होता पंछी मैं बाबा,
भरता ऐसी उड़ान मैं,
जब भी मन होता आ जाता,
उड़कर खाटू धाम में।।
🎤Singer – Ujjal More
☎️Cont. – 9707023441
✍️Lyrics – Nitesh Sharma ‘Golu’








