मैंने ढूंढा चारो ओर,
कान्हा मेरा कित गया,
कित गया रे श्याम,
कीत गया,
ये छलिया माखन चोर,
कान्हा मेरा कीत गया।।
गोकुल में ढूंढा श्याम,
मथुरा में ढूंढा,
वृन्दावन की गलियो में ढूंढा,
मैने ढूंढा चारो ओर,
कान्हा मेरा कीत गया,
ये छलिया माखन चोर,
कान्हा मेरा कीत गया।।
राधा से पुछा श्याम,
गोपियो से पुछा,
मित्र सुदामा से जाके पुछा,
सारे ग्वाल मचा रहे शोर,
कान्हा मेरा कीत गया,
ये छलिया माखन चोर,
कान्हा मेरा कीत गया।।
गुजरिया बोली कान्हो घर आयो,
मटकी फोड़ के माखन खायो,
यो तो बण गयो माखन चोर,
कान्हा मेरा कीत गया,
ये छलिया माखन चोर,
कान्हा मेरा कीत गया।।
दीनू इन्दोरिया क्यू घबरावे,
वादा किया वो क्यू ना निभावे,
अब रिस्ता निभादे यार,
कान्हा मेरा कीत गया,
ये छलिया माखन चोर,
कान्हा मेरा कीत गया।।
मैंने ढूंढा चारो ओर,
कान्हा मेरा कीत गया,
कीत गया रे श्याम,
कीत गया,
ये छलिया माखन चोर,
कान्हा मेरा कीत गया।।
गायक / प्रेषक – दीनू इन्दोरिया।
9887045766








