जय खोली वाले,
तेरे खेल निराले,
तू छोड़ सिग्हासन आया,
पर्वत पे रास रचाया।।
जब जब भीड़ पड़ी भक्तो पे,
तुम ने करी सहाई,
मीरा बाई सदन कसाई,
प्रहलाद की जान बचाई,
तुम कौन को मारन वालें,
संतों के सदा रूखाले,
जय खोली वालें,
तेरे खेल निराले।।
नंदू ब्रहामण को बाबा जी,
तुमने दास बनाया,
गले लगाया दर्शन दिखाया,
अपना भेद बताया,
लिए खोल भाग्य के ताले,
मन मोहन मुरली वालें,
जय खोली वालें,
तेरे खेल निराले।।
नैतराम के हृदय अंदर,
अपनी छवि दिखाई,
गांव मिल्कपुर बना के मन्दिर,
जय जयकार कराई,
तुम कितने भोले भाले,
भक्तो के संकट टाले,
जय खोली वालें,
तेरे खेल निराले।।
सुरेन्द्र सिंह या कलयुग में,
तेरी कला सवाई,
आशा लेकर जोभी आवे,
करता मन की चाही,
कट जाते गम के जाले,
जो रज तेरी ने खाले,
जय खोली वालें,
तेरे खेल निराले।।
जय खोली वाले,
तेरे खेल निराले,
तू छोड़ सिग्हासन आया,
पर्वत पे रास रचाया।।
Singer & Writer – Surender Singh Nithora
9999641853








