म्हारा केसरिया कल्याण,
दोहा – डिग्गी नगर एक धाम है,
जहाँ बसे श्री कल्याण,
रोग कटे दुविधा मिटे,
होत कल्याण ही कल्याण।
म्हारा केसरिया कल्याण,
म्हाने भुल मत ज्याज्यों जी,
भुल मत ज्याज्यों जी,
म्हाने मत बिसरावो जी।।
कला जी मोर मुकुट पितांबर,
म्हारो मनड़ो मोहे जी,
थारी दाढ़ी माई,
जगमग जगमग हीरों चमके जी,
म्हारा केसरीया कल्याण,
म्हाने भुल मत ज्याज्यों जी।।
कला जी काम क्रोध मद,
लोभ म्हारे पाप बढ़ावे जी,
थाका दर्शन तो करबा सु,
म्हारा पाप कट जावै जी,
म्हारा केसरीया कल्याण,
म्हाने भुल मत ज्याज्यों जी।।
कला जी थाके हाथा कि,
राखेड़ी मुरली म्हाने दे दिज्यो,
म्हारे हृदय से लगाया,
पाछे पाछी ले लिजो,
म्हारा केसरीया कल्याण,
म्हाने भुल मत ज्याज्यों जी।।
कला जी जमना जी तो दास,
थाने भजन सुनावे जी,
थे तो कर ज्यों भव से पार,
थाने अर्ज लगावे जी,
म्हारा केसरीया कल्याण,
म्हाने भुल मत ज्याज्यों जी।।
म्हारा केसरीया कल्याण,
म्हाने भुल मत ज्याज्यों जी,
भुल मत ज्याज्यों जी,
म्हाने मत बिसरावो जी।।
गायक – रमेश जी दाधीच।
प्रेषक – रवि कुमार साहु।
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