पर्वो में ये पर्व है प्यारा,
पर्युषण कहलाया है,
जप तप धर्म की गंगा बहाने,
पर्वो का राजा आया है,
सत्य अहिंसा बेर मिटाने,
पर्वो का राजा आया है,
पर्व पर्युषण ये पर्व पर्युषण,
हर जैनी के दिल में खुशियाँ,
घर घर आनंद छाया है,
जप तप धर्म की गंगा बहाने,
पर्वो का राजा आया है,
सत्य अहिंसा बेर मिटाने,
पर्वो का राजा आया है,
पर्व पर्युषण ये पर्व पर्युषण।।
जिन मन्दिर हो या उपाश्रय,
बह रही है भक्ति की धारा,
प्रभु वीर की वाणी सुनलो,
जीवन न मिले दुबारा,
कर्म खपाने का शुभ अवसर,
कर्म खपाने का शुभ अवसर,
बड़े भाग्य से पाया है,
जप तप धर्म की गंगा बहाने,
पर्वो का राजा आया है,
सत्य अहिंसा बेर मिटाने,
पर्वो का राजा आया है,
पर्व पर्युषण ये पर्व पर्युषण।।
मैत्री भाव से मिलकर,
ये पर्व प्रर्युषण मनाये,
क्षमावान बनकर के,
आओ वैर भाव मिटाये,
“दिलबर” ये गौरव कहे,
ये पर्व तो दिल मे समाया है,
जप तप धर्म की गंगा बहाने,
पर्वो का राजा आया है,
सत्य अहिंसा बेर मिटाने,
पर्वो का राजा आया है,
पर्व पर्युषण ये पर्व पर्युषण।।
पर्वो में ये पर्व है प्यारा,
पर्युषण कहलाया है,
जप तप धर्म की गंगा बहाने,
पर्वो का राजा आया है,
सत्य अहिंसा बेर मिटाने,
पर्वो का राजा आया है,
पर्व पर्युषण ये पर्व पर्युषण,
हर जैनी के दिल में खुशियाँ,
घर घर आनंद छाया है,
जप तप धर्म की गंगा बहाने,
पर्वो का राजा आया है,
सत्य अहिंसा बेर मिटाने,
पर्वो का राजा आया है,
पर्व पर्युषण ये पर्व पर्युषण।।
गायक – गौरव कर्णावट जोधपुर।
लिरिक्स – दिलीप सिंह सिसौदिया “दिलबर”
नागदा जक्शन म.प्र.
मो . 9907023365








