कान्हा मेरे मुरली वाले,
करूणा तो बरसाओ,
आन पड़ा हूं शरण तुम्हारी,
अब तो मुझे सम्भालो,
दर्शन दे दो ना,
दर्शन दे दो ना।।
तर्ज – माई नी माई।
अपना तुझको मान के कान्हा,
तोड़ दिया सब नाता,
कश्ती मेरी ना डूबने दोगे,
तुझपे है ये भरोसा,
क्या जतन करूं बोलो कान्हा,
पतवार मेरी जो बन जाओ,
आन पड़ा हूं शरण तुम्हारी,
अब तो मुझे सम्भालो,
दर्शन दे दो ना,
दर्शन दे दो ना।।
छोड़ आया हूं सारा जमाना,
तेरे भरोसे कान्हा,
कोई नहीं है मेरा जग में,
तू ही एक सहारा,
क्या जतन करुं बोलो कान्हा,
तुम नैनो में बस जाओ,
आन पड़ा हूं शरण तुम्हारी,
अब तो मुझे सम्भालो,
दर्शन दे दो ना,
दर्शन दे दो ना।।
जग सुना लगता है हरदम,
तेरे बिना मेरे कान्हा,
अब तो भक्ति दे दो मोहन,
जीवन में हैं अंधेरा,
क्या जतन करुं बोलो कान्हा,
तुम दर्शन मुझको दे जाओ,
आन पड़ा हूं शरण तुम्हारी,
अब तो मुझे सम्भालो,
दर्शन दे दो ना,
दर्शन दे दो ना।।
कान्हा मेरे मुरली वाले,
करूणा तो बरसाओ,
आन पड़ा हूं शरण तुम्हारी,
अब तो मुझे सम्भालो,
दर्शन दे दो ना,
दर्शन दे दो ना।।
लेखक / गायक – पंडित मनोज नागर।
संपर्क – 9893377018








