अग्नकुण्डी में उपन्या,
दोहा – उंचो मगरो उजलो,
बठै आलम दुनिया आवे,
जठै सिद्धां रो बिराजणो,
सारी दुनिया पर्चो पावे।
अग्नकुण्डी में उपन्या,
सिद्ध जात सोलंकिया री साख रे,
गांव गेरासर बाबो आविया,
आदू धूणे वाली धाम रे,
किरत करूं नखतेस बना री,
जन्म जन्म बाबो साथ रे,
धन्य रे सोलंकी सिद्ध राव ने,
म्हारो हेलो सुणी बेगो आव रे।।
भगवी गादी रो सिद्धां बैठणो,
भगवां तम्बूड़ा लगाय रे,
माता खिंवल न मानज्यो,
राखे कुल अपने री लाज रे,
धन्य रे सोलंकी सिद्ध राव ने,
म्हारो हेलो सुणी बेगो आव रे।।
सुरग नदी रो नहावणो,
बाबो धोलिये घोड़े रो असवार रे,
घर रे मादल जी रो मानियो,
मादल सिद्ध जी रो दास रे,
धन्य रे सोलंकी सिद्ध राव ने,
म्हारो हेलो सुणी बेगो आव रे।।
मादल भभूती मांगली,
दे दी जोगेसर हाथ रे,
ईण रे भभूती रो च्यानणो,
चंऊदिस होयो प्रकाश रे,
धन्य रे सोलंकी सिद्ध राव ने,
म्हारो हेलो सुणी बेगो आव रे।।
ईण रे भभूती रे च्यानणे,
आय उभ्यो नखतेख रे,
सेवा सिद्धां री सांवंली,
गावे भीखो सिद्ध रो दास रे,
धन्य रे सोलंकी सिद्ध राव ने,
म्हारो हेलो सुणी बेगो आव रे।।
अगन कुण्डी में उपन्या,
सिद्ध जात सोलंकिया री साख रे,
गांव गेरासर बाबो आविया,
आदू धूणे वाली धाम रे,
किरत करूं नखतेस बना री,
जन्म जन्म बाबो साथ रे,
धन्य रे सोलंकी सिद्ध राव ने,
म्हारो हेलो सुणी बेगो आव रे।।
गायक – सीताराम पचारिया।
प्रेषक – समुन्द्र चेलासरी
मो. – 8107115329








