तेरी कुदरत न्यारी सांवरिया,
दोहा – गुरु गरीब नवाज हो,
पत के राखण हार,
पत राखी प्रहलाद की,
प्रभु गज की सुणी पुकार।
तेरी कुदरत न्यारी सांवरिया,
ओ थारी कुदरत न्यारी जी,
हम नहीं जाणा तुम पत राखो,
जन को लेत उबारी जी।।
भूपत धारी लड़ियों भस्मासुर,
मंत्र फेक्यो भारी जी,
वो सिमरत है सबका स्वामी,
हरि बन गये नारी जी,
थारी कुदरत न्यारी जी।।
हिर्नियाकश्यप सेवा कर शिवजी,
वर मांग्यो मनधारी जी,
खंभ फाड़ नरसिंह होय प्रगट्या,
नरसिंह हरण्यो अहंकारी जी,
थारी कुदरत न्यारी जी।।
मौसी वचन कंस को दीन्हौ,
शक्ति रहती अपारी जी,
बैर लियो कृष्ण से जाकर,
मारियो दुष्ट मुरारी जी,
थारी कुदरत न्यारी जी।।
हुतो धारा सौ नर हारा,
देखें सतगुरु सारी रे,
नवला सन्मुख रहो गुरू के,
निपजावे टेर हमारी रे,
थारी कुदरत न्यारी जी।।
तेरी कुदरत न्यारी साँवरिया,
ओ थारी कुदरत न्यारी जी,
हम नहीं जाणा तुम पत राखो,
जन को लेत उबारी जी।।
गायक – नवरत्न बेरवाल नंगवाडा।
प्रेषक – कुलदीप सिंह ओसियां।
9468586253








