खाटू का बनू पंछी,
तेरे दर पे बसेरा हो,
नित दिन दीदार करूं,
जब शाम सवेरा हो।।
तर्ज – बचपन की मोहब्बत को।
मैं उड़ता फिरूं देखूं,
प्रेमी की कतारों को,
मेरे श्याम,,
मैं भी श्याम लगाऊंगा,
तेरे जयकारों को,
फिर लौट के घर जाऊं,
जब श्याम अंधेरा हो,
नित दिन दीदार करूं,
जब शाम सवेरा हो।।
ज्यादा ना चाहूं मैं,
बस इतना कर देना,
मेरे श्याम,,
दुनिया को तो दर देते,
मुझे दर पे ही घर देना,
कब्जा उस पे बाबा,
तेरा और मेरा हो,
नित दिन दीदार करूं,
जब शाम सवेरा हो।।
नैनों की खिड़की से,
नित रोज निहारू मैं,
मेरे श्याम,,
चौखट से निकल नित दिन,
तकदीर सवारूं मैं,
भजनों की बूंदों से,
प्रभु मेरा गुजारा हो,
नित दिन दीदार करूं,
जब शाम सवेरा हो।।
तू कैद मुझे कर ले,
प्रभु प्रेम पिटारे में,
मेरे श्याम,,
मुझे उम्र कैद देना,
तेरे चौबारे में,
आजाद ना हो राहुल,
ऐसा वक्त सुनहरा हो,
नित दिन दीदार करूं,
जब शाम सवेरा हो।।
खाटू का बनू पंछी,
तेरे दर पे बसेरा हो,
नित दिन दीदार करूं,
जब शाम सवेरा हो।।
Singer – Anurag Mittal
Lyrics – Rahul Mishra
Upload By – Kanak
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