महिमा मेवाड़ री,
ओ मेवाड़ री धरती ने ओ भाई रे,
हाथ जोड़ने खम्मा घणी,
थारो ऋण मां कदेइ ना चुके,
युग-युग वंदना थारी ओ,
महिमा मेवाड़ री।।
एकलिंगनाथ
ओ कैलाशपुरी धरती रे माय,
एकलिंगनाथ बिराजीया,
राणां नै दीवाण बनायो,
धरती रो मान बढ़ायो ओ,
महिमा मेवाड़ री।।
चित्तौड़ – कालिका माता
ओ चित्तौड़ रा किल्ला रे ऊपर,
कालिका मात बिराजीया,
जौहर बलिदान सूं,
इतिहास रचायो ओ,
महिमा मेवाड़ री।।
देबारी घाटा – चामुंडा माता
ओ देबारी घाटा रे माय,
मात चामुंडा बिराजीया,
भ्रमरी बणके मुगला सूं लड़गी,
राणा रो मान बढ़ायो ओ,
महिमा मेवाड़ री।।
नाथद्वारा – श्रीनाथजी
ओ नाथद्वारा री धरती रे माय,
श्रीनाथजी बिराजीया,
राणा राजसिंह शरण दीदी,
धरम बचायो ओ,
महिमा मेवाड़ री।।
कुंभलगढ़ – नीलकंठ महादेव
ओ कुंभलगढ़ रा किला रे माय,
नीलकंठ महादेव बिराजीया,
राणा कुंभा भगती करी,
धरती रो मान बढ़ायो ओ,
महिमा मेवाड़ री।।
समापन
ओ मेवाड़ री धरती ने ओ भाई रे,
देवी अर देवता ई साजीया,
केशव चौबीसा महिमा गावै,
धन्य धन्य धरती हो गई ओ,
महिमा मेवाड़ री।।
लेखक – केशव चौबीसा।
9929931512








