शोभा सुनाऊँ नुगरा की,
ढोर केऊ तो जरा नहीं गलती,
शिंग पुछ दोय बाकी सन्तों,
शोभा सुणाऊँ नुगरा की।।
माटी खायें मदिरा पिवे,
मुख पर भणके माखी,
असल भुण्डा थारा लखण दिखे,
थने भूत केवु के डाकि संतो,
शोभा सुणाऊँ नुगरा की।।
नसो करे सत्संग बैठो,
बुद्धी बिगड गई ज्योकी,
देतो गाण शरम नहीं आवे,
माता गणे नहीं काकी सन्तों,
शोभा सुणाऊँ नुगरा की।।
नाच नचावे आंख फरूकावे,
मुछा मरोड़े ज्याँकि,
अन्त समय वो जावे नारगी,
खावेला मार जमा की सन्तों,
शोभा सुणाऊँ नुगरा की।।
राजा प्रजा गुस्सो मति करजो,
देखी जेड़ी भारखी,
केंवे दुलाराम देश दिवाना,
बिधि ज्यारी पाकी रे संतो,
शोभा सुणाऊँ नुगरा की।।
शोभा सुनाऊँ नुगरा की,
ढोर केऊ तो जरा नहीं गलती,
शिंग पुछ दोय बाकी सन्तों,
शोभा सुणाऊँ नुगरा की।।
गायक – जोगसिंह जी देवड़ा।
प्रेषक – वरधा राम देवासी।
9660534751








