पैसों का क्या है रे,
ये तो आते जाते है,
बेइमानी के पैसे यारो,
बड़े सताते है,
पैसो का क्या हैं रे,
ये तो आते जाते है।।
झूठ कपट और जाल जपट से,
दुनियां पैसा जोड़े,
पैसों को भगवान समझ कर,
अपनों से मुंह मोडे,
दौलत से है बढ़कर सारे,
रिश्ते नाते है,
पैसो का क्या हैं रे,
ये तो आते जाते है।।
पैसों से बिस्तर मिलता है,
नींद नहीं मिलती है,
पैसों से भोजन मिलता है,
भूख नहीं मिटती है,
पैसों से ना रुके जिंदगी,
सब मर जाते है,
पैसो का क्या हैं रे,
ये तो आते जाते है।।
झूठी दौलत झूठी शोहरत,
झूठा माल खज़ाना,
खाली हाथ जगत में आए,
खाली हाथ ही जाना,
अपने बाद में अपने ही,
सब लड़ कर खाते है,
पैसो का क्या हैं रे,
ये तो आते जाते है।।
अपनी मेहनत का ही पैसा,
अपने अंग लगेगा,
सदाचार और पुण्य हमेशा,
अपने संग चलेगा,
नैकी के रस्ते हरि का,
आभास कराते है,
पैसो का क्या हैं रे,
ये तो आते जाते है।।
अपने को अपना समझो,
ओर नहीं पराया अपना,
कहे शानू वो नहीं मिलेगा,
क्यों देखे हैं सपना,
मन में है संतोष सदा,
परमानंद पाते है,
पैसो का क्या हैं रे,
ये तो आते जाते है।।
पैसों का क्या है रे,
ये तो आते जाते है,
बेइमानी के पैसे यारो,
बड़े सताते है,
पैसो का क्या हैं रे,
ये तो आते जाते है।।
गायक / लेखक – शानू रेगर सांवता।
मो. 9610489087








