श्री एकदन्त भगवान की है आरती,
पापियों को पाप से है तारती।।
तर्ज – श्री भागवत भगवान की है आरती।
ये देव एक विपदा अनेक,
हर कष्ट मिटाने वाले,
विपदा को हराने वाले,
ये देव एक विपदा अनेक,
हर कष्ट मिटाने वाले,
विपदा को हराने वाले,
हर सुबह यही हर शाम यही,
हर सुबह यही हर शाम यही,
श्री लंबोदर की आरती,
पापियों को पाप से है तारती।।
श्री एकदंत भगवान की है आरती,
पापियों को पाप से है तारती।।
तुम एक दन्त पर हो अनंत,
तुम्हे जान सका ना कोई,
पहचान सका ना कोई,
तुम एक दन्त पर हो अनंत,
तुम्हे जान सका ना कोई,
पहचान सका ना कोई,
हर ज्ञान तुम्ही हर ध्यान तुम्ही,
हर ज्ञान तुम्ही हर ध्यान तुम्ही,
श्री वक्रतुंड की आरती,
पापियों को पाप से है तारती।।
श्री एकदंत भगवान की है आरती,
पापियों को पाप से है तारती।।
हो शूर्प कर्ण मस्तक पे स्वर्ण,
हाथों में अंकुश साजे,
पांवो में पैंजन बाजे,
हो शूर्प कर्ण मस्तक पे स्वर्ण,
हाथों में अंकुश साजे,
पांवो में पैंजन बाजे,
हर शक्ति तुम्ही,
हर भक्ति तुम्ही,
श्री प्रथम पूज्य की आरती,
पापियों को पाप से है तारती।।
श्री एकदंत भगवान की है आरती,
पापियों को पाप से है तारती।।
श्री एकदन्त भगवान की है आरती,
पापियों को पाप से है तारती।।
By – Team Bhajan Diary
Writer – Dev Patidar Kariya
8602107414








