वृन्दावन में आए बिहारी,
लाज रख लो,
दिन बंधु दीनानाथ,
बात रख लो,
दिन बंधु दीनानाथ,
बात रख लो,
दिन बंधु दीनानाथ,
बात रख लो,
वृंदावन में आए बिहारी,
लाज रख लो,
दिन बंधु दीनानाथ,
बात रख लो।।
तर्ज – ऊबो थारी हाजरी बजाऊं सांवरा।
मेरी अर्जी तेरी मर्जी,
कैसी सांवरे,
मेरी अर्जी तेरी मर्जी,
कैसी सांवरे,
क्यों नहीं सुनता बात मेरी,
बेदर्दी सांवरे,
क्यों नहीं सुनता बात मेरी,
बेदर्दी सांवरे,
आज तुम्हारा दर ना छोड़ु,
साथ रख लो,
दिन बंधु दीनानाथ,
बात रख लो।।
वृंदावन के हो तुम राजा,
कैसे तुम्हारे ठाठ,
वृंदावन के हो तुम राजा,
कैसी तुम्हारे ठाठ,
श्यामा जू से करूं शिकायत,
शायद बन जाए बात,
श्यामा जू से करूं शिकायत,
शायद बन जाए बात,
हियरा में मेरे आए बिहारी,
वास कर लो,
दिन बंधु दीनानाथ,
बात रख लो।।
भिलनी विदुर सुदामा के,
मेवा तुमने खाए,
भीलनी विदुर सुदामा के,
साग तुमने खाए,
हमसे कैसी भूल भई जो,
मेरे घर ना आए,
हमसे कैसी भूल भई जो,
मेरे घर ना आए,
माखन मिश्री और प्रेम का,
स्वाद रख लो,
दिन बंधु दीनानाथ,
बात रख लो।।
बड़े-बड़े पापी कन्हैया,
तुमने जगत में तारे,
बड़े-बड़े पापी कन्हैया,
तुमने जगत में तारे,
‘अभिषेक’ भी पापी आया,
देखो तुम्हारे द्वारे,
अभिषेक भी पापी आया,
देखो तुम्हारे द्वारे,
कुंज बिहारी सर पे मेरे,
हाथ रख दो,
दिन बंधु दीनानाथ,
बात रख लो।।
वृन्दावन में आए बिहारी,
लाज रख लो,
दिन बंधु दीनानाथ,
बात रख लो,
दिन बंधु दीनानाथ,
बात रख लो,
दिन बंधु दीनानाथ,
बात रख लो,
वृंदावन में आए बिहारी,
लाज रख लो,
दिन बंधु दीनानाथ,
बात रख लो।।
स्वर – अभिषेक तिवारी जी।
प्रेषक – ओमप्रकाश पांचाल उज्जैन मध्य प्रदेश।
9926652202








