ओ लीलण सिणगारे,
कड़वा कड़वा बोल,
बोल्या भाभज म्हारी ए,
शूरा रे लागे कोरे काळजे।
ओ लीलण सिणगारे,
पनेरा जावे रे,
ओ लीलण सिणगारें,
पनेरा जावे रे,
ए तेजल आवे रे,
ए भालो भळके रे,
ए तेजल आवे रे,
ए भालो भळके रे।।
किणरी कहिजे लाडकड़ी ने,
कांहि उणरो गाँव रे,
किया रे देशां में पेमल रो रेवणो।
गाँव पनेरा जाइजो जी,
पेमल ने लाइजो जी,
पनेरा जाइजो जी,
पनेरा जाइजो जी,
रायमलजी री लाडकड़ी,
पेमल थारी गोरी रे,
पेमल थारी गोरी रे,
पेमल थारी गोरी रे।।
ओ कुण म्हारी कीनी,
सगाई माता जरणी ए,
कुण तो परणायो पीळा पोतड़ां।
ए काका बाबा परणावे,
ए मामोसा परणावे,
ए काका बाबा परणावे,
ए मामोसा परणावे,
काक्यां माम्यां गावे रे,
ए मंगळा गावे रे,
काक्यां माम्यां गावे रे,
ए मंगळा गावे रे।।
हो लीलण पे असवार तेजल,
गाँव पनेरा जावे रे,
रायमल जी री पोळ्यां जावे पांवणो।
ए कड़वा-कड़वा बोल्या रे,
लीलण म्हाने बोलणा,
ए कड़वा-कड़वा बोल्या रे,
ए सासू म्हाने बोलणा,
ए तेजल म्हारो जावे रे,
ए तेजल म्हारो जावे रे,
ए परण्या ने मनावो माँ,
ए तेजल म्हारा जावे रे,
ए कंवरा आवो नी,
ए भोजन जीमो नी,
ए पोळ्यां जीमाजो नी,
ए राणी रट गावे रे,
ए भोजन जीमो नी।।
गायिका – रानी रंगीली / रेखा रंगीली।
प्रेषक – सुभाष सारस्वा काकड़ा।
9024909170








