लग रही आस करूँ ब्रजवास,
तलहटी गोवर्धन की मैं।।
भजन करूं और ध्यान धरूं,
छैंया कदमन की मैं,
सदा करूं सत्संग मंडली,
संत जनन की मैं,
लग रही आस करूं बृजवास,
तलहटी गोवर्धन की मैं।।
पलकन डगर बुहारू रेणुका,
ब्रज गलियन की मैं,
अभिलाषी प्यासी रहें अंखियां,
हरि दरसन की मैं,
लग रही आस करूं बृजवास,
तलहटी गोवर्धन की मैं।।
भूख लगै घर घर तें भिक्षा,
करूं द्विजन की मैं,
गंगा जल में धोय भेंट करूं,
नंदनंदन की मैं,
लग रही आस करूं बृजवास,
तलहटी गोवर्धन की मैं।।
शीत प्रसाद हि पाय करूं,
शुद्धि निज तन की मैं,
सेवा में मैं लगा रहूं,
नित हरि भक्तन की मैं,
लग रही आस करूं बृजवास,
तलहटी गोवर्धन की मैं।।
ब्रज तज इच्छा करूं नहीं,
बैकुंठ भवन की मैं,
‘घासीराम’ शरण पहुंचू,
गिरिराज धरण की मैं,
लग रही आस करूं बृजवास,
तलहटी गोवर्धन की मैं।।
लग रही आस करूँ ब्रजवास,
तलहटी गोवर्धन की मैं।।
Singer – Sadhvi Purnima Ji
देखें – श्री गिरिराज वास मैं पाऊं।








