हे कलिया नाडी री तिर,
भभुता सिध्द विराजे जी,
नखत बन्ना विराजे,
गढ चारणवाली धाम पे,
म्हारी घणी घणी खम्मा,
सिद्ध सोलंकी सिरदार ने।।
हे दुध पतासा चाढा,
भभुता सिध्द आप रे,
उजले चावला री खीर,
में चारणवाला धाम पे,
म्हारी घणी घणी खम्मा,
सिद्ध सोलंकी सिरदार ने।।
हे ढोल नगाड़ा बाजे,
भभुतासिध्द आप रे,
आ झालरी झणकार,
आ चारणवाला धाम पे,
ऐ नोबत गरा बाजे,
नखत बन्ना सां आप रे।।
अरे कानसिंह रा जाया,
सुगणा बहन आपरे,
मां धांधल हुलराया,
थाने चारणवाले गांव में,
मां धांधल हुलराया,
थाने चारणवाले गांव में।।
भभुता सिध्द रो मेलो,
भादुड़ी छट सातम ने,
ओ नखत बन्ना को मेलो,
भादुड़ी चोथ पांचम ने,
अरे चारणवाले मेलो,
भादुड़ी चोथ पांचम ने।।
ओ नखत बन्ना की धाम,
एक स्वरुपसर गांव में,
ओ सातम की जोता जागे,
सोलंकी सिरदार रे,
ओ अशोक जी मलघट ध्यावे,
सिद्ध सोलंकी सिरदार ने।।
हे कलिया नाडी री तिर,
भभुता सिध्द विराजे जी,
नखत बन्ना विराजे,
गढ चारणवाली धाम पे,
म्हारी घणी घणी खम्मा,
सिद्ध सोलंकी सिरदार ने।।
गायक – गजेंद्र जी अजमेरा।
प्रेषक – अशोक पुजारी स्वरुपसर।
8696510972








