हर पाँचम को चूरू जाये,
भक्ति में तेरी हम खो जाये,
यही मांगे तू मिल जाये,
बाबोसा तू मिल जाये।।
तर्ज – राम करे ऐसा हो जाये।
तू ही मेरा मीत है,
प्रीतम प्यारा,
जन्मो का है रिस्ता हमारा,
छोड़ू ना में साथ तुम्हारा,
प्रीत का बंधन,
ये बंध जाये,
तेरी शरण में हम खो जाये,
यही मांगे तू मिल जाये,
बाबोसा तू मिल जाये।।
कौन सुने किसको कहे,
अपना फसाना,
स्वार्थ भरा है ये जमाना,
दिल की बाते तुमको सुनाना,
हमपे कृपा ऐसी हो जाये,
तन मन बस तुझमें रम जाये,
यही मांगे तू मिल जाये,
बाबोसा तू मिल जाये।।
टूट नही जाये कही,
प्रीत की डोरी,
पकड़ो अब बय्या मोरी,
नेनो में छवि तोरी,
“दिलबर” तुमसे से,
दिल मिल जाये,
जीवन नैया पार हो जाये,
यही मांगे तू मिल जाये,
बाबोसा तू मिल जाये।।
हर पाँचम को चूरू जाये,
भक्ति में तेरी हम खो जाये,
यही मांगे तू मिल जाये,
बाबोसा तू मिल जाये।।
गायक – श्री हर्ष व्यास मुम्बई।
रचनाकार – दिलीप सिंह सिसोदिया ‘दिलबर’
नागदा जक्शन म.प्र.
मो. 9907023365
प्रेषक – श्री अजय गोलछा हैदराबाद।








