तुम्हें छोड़ कोई हमारा नहीं है,
अभय हो जिसे पा सहारा नहीं है।।
ना माता पिता मित्र कोई भी जग में,
हितेषी तेरा सा सहारा नहीं है,
तुम्हे छोड़ कोईं हमारा नही है,
अभय हो जिसे पा सहारा नहीं है।।
कृपा करते मुझपे हीचकते हो मोहन,
क्या मुझसे अधम कोई तारा नहीं है,
तुम्हे छोड़ कोईं हमारा नही है,
अभय हो जिसे पा सहारा नहीं है।।
तरें किस तरह नाथ संसार सागर,
कहीं भी तो दिखे किनारा नहीं है,
तुम्हे छोड़ कोईं हमारा नही है,
अभय हो जिसे पा सहारा नहीं है।।
पतित ‘राम’ से जो ही ना आओगे भगवन,
तो इसमें अजस क्या तुम्हारा नहीं है,
तुम्हे छोड़ कोईं हमारा नही है,
अभय हो जिसे पा सहारा नहीं है।।
तुम्हें छोड़ कोई हमारा नहीं है,
अभय हो जिसे पा सहारा नहीं है।।
लेखक – रामदास जी महाराज।
स्वर – राजेंद्र दास देवाचार्य जी महाराज।
प्रेषक – ओमप्रकाश पांचाल उज्जैन मध्य प्रदेश।
9926652202








