चले आओ चले आओ,
तुम्हे अपनी सुनानी है,
ये मेरी आपबीती है,
ये मेरी ही कहानी है,
चलें आओं चलें आओं,
तुम्हे अपनी सुनानी है।।
हरि तुम मेरी चाहत हो,
किसी से हमको क्या लेना,
किसी से हमको क्या लेना,
करें क्यों फिक्र दुनिया की,
हमें तुमसे निभानी है,
चलें आओं चलें आओं,
तुम्हे अपनी सुनानी है।।
शरण में ले भी लो हमको,
की चरणों में ही रहने दो,
की चरणों में ही रहने दो,
लगन तुमसे लगाई है,
तुम्ही ने बिगड़ी बनानी है,
चलें आओं चलें आओं,
तुम्हे अपनी सुनानी है।।
बहुत तरसी हूँ मैं मोहन,
बस एक फरियाद है तुमसे,
बस एक फरियाद है तुमसे,
जो दिल की बात दिल में है,
वो तुमको ही बतानी है,
चलें आओं चलें आओं,
तुम्हे अपनी सुनानी है।।
चलें आओं चलें आओं,
तुम्हे अपनी सुनानी है,
ये मेरी आपबीती है,
ये मेरी ही कहानी है,
चलें आओं चलें आओं,
तुम्हे अपनी सुनानी है।।
स्वर – निकुंज कामरा जी।
प्रेषक – ओमप्रकाश पांचाल उज्जैन मध्य प्रदेश।
9926652202








